शिवसेना को 2 और सीटें, लेकिन महाराष्ट्र में बड़ा भाई BJP ही

केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम पड़ाव पर है. अगले तीन-चार महीनों के दौरान जहां देश में आम चुनाव की प्रक्रिया चलेगी, वहीं केन्द्र सरकार 1 फरवरी को अपना अंतरिम बजट लेकर आएगी. हालांकि यह अंतरिम बजट नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही तक सीमित रहेगा, लेकिन मोदी सरकार इस अंतरिम बजट की स्पीच का दायरा तिमाही से बढ़ाकर आने वाली नई सरकार के कार्यकाल की तीन तिमाहियों पर भी निशाना साधने का काम करने जा रही है.

मोदी सरकार अपने कार्यकाल में पेश किए गए सभी पूर्ण बजटों को आधार बनाते हुए इस अंतरिम बजट के जरिए चुनाव से पहले अपनी आर्थिक नीति को देश के सामने रखने का काम करने जा रही है. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार आगामी आम चुनावों में सत्ता का खुद को विपक्ष से अधिक मजबूत दावेदार दिखाने का काम करेगी. लिहाजा, एक नजर मोदी सरकार के पिछले सभी बजट पर डालने की जरूरत है जिससे अंदाजा लगाया जा सके कि अंतरिम बजट में वित्त मंत्री की बजट स्पीच किन उपलब्धियों को अपनी आर्थिक नीति में जोड़ने का काम करेगी.

मोदी सरकार का पांचवां बजट (2018-19)

यह मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट था. इस बजट से पहले केन्द्र सरकार के सामने 8 राज्यों में चुनाव के साथ-साथ साल के अंत में लोकसभा चुनाव का सामना करने की चुनौती थी. लिहाजा, इस बजट को लोकलुभावन बनाते हुए सरकार के सामने अपनी फ्लैगशिप योजनाओं के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान करने की चुनौती थी. हालांकि बजट ने मध्य वर्ग को मायूस किया.

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महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच बात बनती हुई नजर आ रही है. राज्य में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन के बाद बीजेपी अब किसी भी सूरत में शिवसेना को अपने से अलग रखना नहीं चाहती है. शिवसेना के तल्ख तेवर के आगे बीजेपी उसकी शर्तों पर गठबंधन करने को तैयार होती दिख रही है. सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच गठबंधन होता है तो शिवसेना को पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं.

सूत्रों की मानें तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व गठबंधन कर लोकसभा चुनाव में साथ उतरना चाहते हैं. राज्य की 48 सीटों में से शिवसेना ने 24-24 सीट शेयरिंग का फॉर्मूला बीजेपी के सामने रखा है. इसमें पालघर सीट पर भी शिवसेना ने दावा किया है, जिसे हाल ही में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की थी.

सूत्रों की मानें तो शिवसेना के लिए बीजेपी की ओर से दो अतरिक्त सीटों पर सहमति जताई है. इसके अलावा एक और सीट देने के लिए पार्टी तैयार है और साथ ही दोनों पार्टियों के बीच कुछ सीटें अदली-बदली जाएंगी. लेकिन बीजेपी किसी भी सूरत में पालघर सीट को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. सूत्रों की मानी जाए तो दोनं पार्टियों के बीच 23-25 सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति बन सकती है.

बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. राज्य की 48 संसदीय सीटों में से शिवसेना ने राज्य में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 18 सीटों में जीत हासिल की थी. वहीं, बीजेपी ने 24 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 23 पर जीत दर्ज की थी.

शिवसेना सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के साथ गठबंधन होता है तो ऐसी हालत में शिवसेना के खाते में सीटें बढ़ सकती हैं. शिवसेना अपने खाते से किसी भी अन्य के लिए कोई सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. वो चाहती है कि बीजेपी अपने कोटे से अन्य दलों को सीटें दे.

हाल ही मीडिया सर्वे में महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी को भारी बढ़त दिखाई गई है. जबकि बीजेपी और शिवसेना को तगड़ा झटका लग सकता है. इतना ही नहीं बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को पूर्ण बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में बीजेपी किसी भी सूरत में अपने किसी भी सहयोगी को नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि भाजपा महाराष्ट्र में अपनी अहम पार्टनर शिवसेना को अपने साथ ही रखना चाहती है.

अपने पहले साल के कार्यकाल के दौरान सरकार ने 12 करोड़ से अधिक परिवारों को आर्थिक मुख्यधारा में लाने का भी दावा किया. इस वार्षिक बजट के जरिए केन्द्र सरकार ने देश में जीएसटी लागू करने और जनधन, आधार और मोबाइल के जरिए डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर को लॉन्च करने के लिए प्रावधान किया.

यह बजट मोदी सरकार ने तीन तिमाहियों के लिए पेश किया. इससे पहले पूर्व की मनमोहन सिंह सरकार पहली तिमाही का प्रावधान अपने अंतरिम बजट से कर चुकी थी. बजट भाषण में वित्त मंत्री ने संसद में कहा कि देश की जनता ने तेज विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए नई सरकार चुनी है.

अपने पहले भाषण में सरकार ने देश की सवा सौ करोड़ जनता की बेरोजगारी, इंफ्रास्ट्रक्चर और भ्रष्टाचार के खात्मे के साथ कड़े आर्थिक सुधारों को अपनी आर्थिक नीति के केन्द्र में रखने की बात कही.

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